उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर क्या कहा? | Supreme Court Remarks by Vice President Jagdeep Dhankhar
📌 परिचय: न्यायपालिका और संसद के बीच बढ़ती बहस
हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के कार्यों और निर्णयों पर कुछ कड़ी टिप्पणियाँ कीं। उनके बयानों ने न्यायपालिका, कार्यपालिका और संसद के बीच की सीमाओं और संतुलन पर बहस को फिर से तेज कर दिया है।
⚖️ NJAC कानून को रद्द करने पर सवाल
उपराष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) को रद्द करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला संसदीय संप्रभुता (Parliamentary Sovereignty) के खिलाफ था।
❝एक संविधान संशोधन जिसे संसद और कई राज्यों ने पास किया, उसे अदालत ने खारिज कर दिया — यह जनमत और लोकतंत्र का अनादर है।❞
🧱 'बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत' पर असहमति
धनखड़ ने 1973 के केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए Basic Structure Doctrine को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत से संसद की संविधान संशोधन करने की शक्ति सीमित हो जाती है।
❝मैं इस विचार से सहमत नहीं हूँ कि अदालत तय करे कि संविधान में क्या बदला जा सकता है और क्या नहीं।❞
🛑 “सुप्रीम कोर्ट के जज राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकते”
उपराष्ट्रपति ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
❝सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राष्ट्रपति को कोई आदेश नहीं दे सकते। राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख हैं। यह संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।❞
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका को संविधान में निर्धारित सीमाओं में रहकर ही कार्य करना चाहिए।
🏢 कार्यपालिका में न्यायपालिका की भागीदारी पर चिंता
धनखड़ ने यह सवाल भी उठाया कि कैसे मुख्य न्यायाधीश (CJI) कार्यपालिका से जुड़ी नियुक्तियों में भाग ले सकते हैं? उन्होंने इसे संवैधानिक संतुलन के खिलाफ बताया।
🔍 निष्कर्ष: लोकतंत्र में सीमाओं का सम्मान ज़रूरी
उपराष्ट्रपति की बातों का सार यही था कि लोकतंत्र तब तक मजबूत रहता है जब तक उसके तीनों स्तंभ – संसद, न्यायपालिका और कार्यपालिका – अपनी सीमाओं में रहकर काम करें। उन्होंने न्यायपालिका से संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।
📢 यह क्यों ज़रूरी है?
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यह बहस हमें संविधान की व्याख्या करने के अधिकार और उसकी सीमाओं को समझने में मदद करती है।
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लोकतंत्र में संवैधानिक संतुलन ही राष्ट्र को स्थिर और मज़बूत बनाए रखता है।




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